गिरडीह, जून 3 -- बगोदर, प्रतिनिधि। आदिवासी बहुल गांवों में अब सामाजिक कार्यक्रमों और रीति-रिवाजों में डीजे की तेज आवाज की जगह पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुन सुनाई देगी। सरकार ने पुरानी सामाजिक कला और संस्कृति को जीवित रखने के लिए आदिवासी समुदाय के बीच वाद्य यंत्रों का वितरण शुरू कर दिया है।

पारंपरिक वाद्य यंत्रों का वितरण मंगलवार को बीडीओ निशा कुमारी ने बगोदर प्रखंड के आदिवासी बहुल अड़वारा पंचायत के ध्वैया, बेलगांय और छोलाबार गांव के आदिवासी समुदाय को पारंपरिक वाद्य यंत्र सौंपे। इस अवसर पर प्रखंड कल्याण पदाधिकारी रजा अहमद, मुंडरो मुखिया बंधन महतो, अड़वारा के मुखिया प्रतिनिधि धनेश्वर मरांडी और पूर्व मुखिया लालजीत मरांडी उपस्थित थे। वितरित किए गए वाद्य यंत्रों में नगाड़ा, मांदर, करताल, बांसुरी, सारंगी, सनम, निपुर, झाल, घुंघरू, पाइगान, ...