अटूट श्रद्धा और भावों की शुद्धि धर्म का मूल है: मुनि शुभ चन्द्र सागर
हापुड़, अप्रैल 14 -- दिगम्बर जैन मुनि श्री 108 शुभ चन्द्र सागर जी महाराज ने मंगलवार की सुबह कसेरठ बाजार स्थित श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में जैन भक्तों को प्रवचन देते हुए कहा कि अटूट श्रद्धा और भावों की शुद्धि धर्म का मूल है। धर्म के समस्त कार्य पूजन, विधान पाठ, णमोकार महामंत्र का जाप, दान, जीव दया, परोपकार हमारे भावो को शुद्ध तथा पवित्र बनाते हैं। जैन मन्दिर की तीर्थकरों की प्रतिमाओं में प्राण प्रतिष्ठा होने से तीर्थकर स्वरूप ही नही तीर्थकर ही हैं। पूरी श्रद्धा और विश्वास से इनके सम्मुख की गई याचना अवश्य ही फलदायी होती है। जो मन से पूजा करते हैं, पूजा उनको फल देती है। पूजा भक्त पुजारी के सब संकट हर लेती है। महाराज तथा पूजा दीदी (दिल्ली) के सानिध्य में गुरू भक्ति, आरती, प्रश्न मंच का आयोजन हुआ। सही उत्तर बताने वालों को पारितोषिक प...
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