अटका नरसंहार की घटना को याद कर 28 साल बाद भी कांप जाती है रुह
गिरडीह, जुलाई 7 -- धर्मेंद्र पाठक, बगोदर। 28 साल बीत गए, मगर अटका नरसंहार की याद आते ही आज भी रुह कांप जाती है। 7 जुलाई 1998 को एकीकृत बिहार में बगोदर के अटका के दमौआ मैदान में नक्सलियों ने पंचायत कर रहे ग्रामीणों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी। तत्कालीन मुखिया मथुरा प्रसाद मंडल सहित 10 बेकसूरों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कई घायल हुए, कई बाल-बाल बचे थे। घटना के बाद तत्कालीन सीएम राबड़ी देवी, लालू यादव समेत नेताओं-अधिकारियों का हुजूम पहुंचा था। सीएम ने मृतकों के एक-एक आश्रित को नौकरी देने की घोषणा की थी। 2 साल बाद झारखंड बना और नौकरी का मामला फाइलों में दफन हो गया। नौकरी का इंतजार आज भी, सरकार ने बिहार कहकर टाला
नरसंहार में मारे गए लोगों के परिजन नरसंहार में मारे गए तत्कालीन मुखिया स्व. मथुरा प्रसाद मंडल के पुत्र भाजपा नेता दीपू मंडल ...
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