अच्छे संबंध और सकारात्मक सोच जीवन को सुखद बनाते है- जैन मुनि
शामली, मई 27 -- शामली। दिगम्बर जैन धर्मशाला में विराजमान वाक्केसरी आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर मुनिराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में परिवार, संस्कार और कर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। परिवार केवल संबंधों का समूह नहीं, बल्कि जीवन की पहली पाठशाला है, जहां व्यक्ति प्रेम, सहयोग, अनुशासन और सदाचार की शिक्षा प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि परिवार से मिलने वाले संस्कार ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं और उसे सही दिशा प्रदान करते हैं। अच्छे संबंध और सकारात्मक सोच जीवन को सुखद एवं सार्थक बनाते हैं। जैन दर्शन में कर्म सिद्धांत को विशेष महत्व दिया गया है। यह भी पढ़ें- आत्मचिंतन और सत्कर्म से मिलता है जीवन का वास्तविक सुख: विनिश्चय सागर मनुष्य जो भी कर्म करता है, उसका फल उसे स्वयं ही भोगना पड़ता है। माता-पिता, परिवार ...
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