आरा, फरवरी 26 -- प्रखंड के धनौती गांव में आयोजित मां काली प्राण प्रतिष्ठा सह शतचंडी महायज्ञ के अवसर पर प्रवचन आरा। हिन्दुस्तान संवाददाता बड़े भाग मानुष तन पावा, सुर दुर्लभ सब ग्रंथन्हि गावा। अर्थात यह मानव शरीर अत्यंत भाग्य से मिलता है और देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। यह मोक्ष का द्वार और ईश्वर की भक्ति करने का साधन है। इसे पाकर परलोक (आध्यात्मिक जीवन) संवारना चाहिए। चरपोखरी प्रखंड के धनौती गांव में आयोजित मां काली प्राण प्रतिष्ठा सह शतचंडी महायज्ञ के अवसर पर श्री महंत रघुनाथ दास जी महाराज ने प्रवचन करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि देवताओं को भी दुर्लभ: यह शरीर केवल भोग-विलास के लिए नहीं, बल्कि भक्ति और अच्छे कर्मों के लिए है। यह तन सभी साधनाओं का केंद्र है। इससे मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त की जा सकती है। इस शरीर को पाकर भी परलोक नहीं सुधा...
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