अरुण कुमार जैमिनि, जून 2 -- अग्नि वैदिककालीन देवता हैं। इसकी पुष्टि ऋग्वेद के प्रथम मंत्र ऊं अग्निमीले पुरोहितम् यज्ञस्य देवमृत्विजम्...में अग्नि की आराधना से होती है। इसके पहले अध्याय में नौ श्लोक अग्नि को समर्पित हैं। इससे पता चलता है कि हजारों साल पहले ही हमारे ऋषियों ने अग्नि के महत्व को जान लिया था। ऋषि यास्क ने अग्नि को अग्रणि कहा है यानी अग्नि का स्थान पहला है। आठ वसुओं में अग्नि का स्थान प्रथम है। अग्नि का अर्थ है, जो ऊपर की ओर जाता हो। ब्रह्मांड में अग्नि चार रूपों में मौजूद है। पहली आकाश में सूर्य, दूसरी अंतरिक्ष में विद्युत, तीसरी पृथ्वी पर साधारण अग्नि के रूप में और चौथी पाताल में ज्वालामुखी के रूप में। पृथ्वी पर अग्नि के कई रूप हैं, लेकिन इसके पांच रूप अधिक प्रसिद्ध हैं। यज्ञाग्नि- अग्नि के इस रूप द्वारा मनुष्य लोक कल्याण की ...