वाराणसी, अप्रैल 25 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। काशी जैसे प्राचीन आध्यात्मिक केंद्र एवं अखाड़ों की परंपराएं ही सनातन धर्म की आत्मा हैं। सनातन की आत्मा का संरक्षण ही नहीं संवर्धन भी अत्यंत आवश्यक है। कलिकाल में जिस प्रकार सनातन धर्म पर आक्रमण किए जा रहे हैं, उससे रक्षा के लिए प्रत्येक सनातनी को सजग रहना होगा।ये बातें श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के जगद्गुरु स्वामी चक्रपाणिनंद गिरि ने कहीं। जगद्गुरु बनने के बाद प्रथम काशी आगमन पर हनुमान घाट स्थित अखाड़ा में शुक्रवार को आयोजित संत सभा को संबोधित कर रहे थे। आदिशंकराचार्य महाराज द्वारा गठन के बाद से अब तक के दो हजार वर्ष से अधिक के कालखंड में अखाड़ों ने समय-समय पर अपने आप को संवर्धित किया है। देशकाल और परिस्थितियों के अनुरूप अपने व्यवहारिक जीवन में परिवर्तन किया है, लेकिन साथ ही साथ परंपराओं से ...