नई दिल्ली, फरवरी 18 -- किंशुक पाठक,एसोसिएट प्रोफेसर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय इस डिजिटल युग में, जहां सोशल मीडिया और स्मार्टफोन ने सूचनाओं के आदान-प्रदान के माध्यमों को बदल दिया है, वहां आज भी एक वर्ग अखबार पढ़ने की आदत की परंपरा को संजोए हुए है। दरअसल, जहां लोकतंत्र राष्ट्र-चेतना के साथ समन्वित है, वहां अखबार न केवल समाचार प्रदान करते हैं, अपितु नागरिकों को अपने अधिकारों, कर्तव्यों और नीतियों के प्रति जागरूक, शिक्षित और मुखर भी बनाते हैं। हालांकि, डिजिटल युग में अखबार की प्रासंगिकता बनाए रखना एक चुनौती भी है और आवश्यकता भी। वैश्विक स्तर पर यदि मूल्यांकन करें, तो अखबार पढ़ने की आदत में औसतन कमी दर्ज की गई है, इसके बावजूद यह करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बना हुआ है। साल 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर प्रिंट और ...