अखंड सौभाग्य के लिए वट सावित्री व्रत का प्रथम संयम 14 मई से
वाराणसी, मई 14 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। अखंड सौभाग्य की कामना से सुहागिनें वट सावित्री व्रत करती हैं। यह ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से अमावस्या तिथि तक चलता है। इस वर्ष 14 मई को चतुर्दशी पर इसका प्रथम और 15 मई को दूसरा संयम होगा। मुख्य व्रत 16 मई को अमावस्या पर रखा जाएगा। मान्यता है कि वट वृक्ष के मूल में ब्रह्मा, धड़ में विष्णु और शीर्ष में शिव का वास होता है। अखंड सौभाग्य के लिए तीनों देवों की आराधना का विशेष महात्म्य है। सनातन धर्म में विशेष कामना की पूर्ति के लिए व्रत-उपवास रख देवी-देवताओं के पूजन-अर्चन की परंपरा है। इसमें वट सावित्री व्रत प्रमुख है। ज्योतिषाचार्य पं. विकास शास्त्री के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई को भोर में पांच बजकर 12 मिनट पर लगेगी। यह 16 मई को मध्यरात्रि के बाद रात एक बजकर 31 मिनट तक रहेगी। इसी दिन व...
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