अक्षय तृतीया से ही प्रारंभ हुई थी आहारदान की परंपरा
ललितपुर, अप्रैल 20 -- ललितपुर। भगवान ऋषभदेव की आहारचर्या अक्षय तृतीया के दिन से ही प्रारंभ हुई और उनका प्रथम आहार इक्षुरस से हुआ था। इसको ध्यान में रखकर जैन मंदिरों में प्रात:काल अभिषेक पूजन के उपरान्त भगवान आदिनाथ का पूजन कर अर्घ्य समर्पित किए गए। श्रावकों ने निकटवर्ती स्थानों पर विराजमान मुनिराजों को आहारदान कर पुण्यार्जन किया। धार्मिक मान्यता अनुसार राजा ऋषभदेव ने मुनिदीक्षा धारण के उपरान्त छह माह का उपवास लेकर आहारचर्या के लिए निकले थे। उस समय नवदाभक्ति पूर्वक आहार की विधि न मिलने के कारण पडगाहन नहीं हो पाया। सात माह माह नौ दिन के उपरान्त अक्षय तृतीया को हस्तिनापुर नगरी में मुनिराज का प्रथम आहार राजा श्रेयांस के यहां हुआ और आहार में मात्र इच्छुरस गृहण किया था। यह भी पढ़ें- जैन घाट पर भक्तांबर पाठ किया गया तब से आज तक अक्षय तृतीया को ज...
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