राधिका पी. नायर, जनवरी 5 -- बदलती जीवनशैली और तेज रफ्तार जिंदगी के बीच अकेलापन सिर्फ व्यक्तिगत या मनोवैज्ञानिक समस्या नहीं रह गया है। कई स्टार्ट-अप ने इसे व्यवसायिक अवसर में बदल दिया। महानगरों में लोग अकेलापन दूर करने के लिए किराये पर संगी-साथी तलाश रहे हैं। यह चलन 'लोनलीनेस इकॉनमी' के रूप में उभर रहा है, जहां वास्तविक बातचीत, साथ बैठने और सामाजिक जुड़ाव के लिए लोग भुगतान करने को तैयार हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने लोगों को आपस में जुड़े रहने का भ्रम तो दिया है, लेकिन आमने-सामने की बातचीत की कमी ने भावनात्मक दूरी बढ़ा दी है। नौकरी के कारण शहर बदलना, परिवार से दूर रहना और सीमित सामाजिक दायरे ने अकेलेपन को और गहरा किया है। सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रुझान इस बात का संकेत है, लोग अब डिजिटल लाइक्स...
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