नई दिल्ली, सितम्बर 1 -- असमय चले गए परिजन की याद से परिवार सिर्फ शोक से नहीं, कई सवालों से भी घिर जाता है। अंतिम संस्कार हो चुका होता है, फिर भी मन नहीं मानता कि आत्मा को शांति मिली या नहीं। हिंदू धर्म में ऐसी मृत्यु के बाद आत्मा की शांति के लिए कई कर्म बताए गए हैं। नारायण बलि उन्हीं में एक विशेष अनुष्ठान माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सामान्य अंत्येष्टि से कुछ स्थितियों में शांति पूरी नहीं हो पाती है। गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प में भी इससे जुड़ी चर्चा मिलती है।नारायण बलि किसे कहते हैं? नारायण बलि एक वैदिक कर्मकांड है। इसका मकसद मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति देना बताया जाता है। मान्यता है कि अकाल मृत्यु होने पर आत्मा भटक सकती है। अंतिम संस्कार या बाकी जरूरी कर्म अधूरे रह गए हों, तब यह अनुष्ठान कराया जाता है। परिवार इसे अपने कर्तव्य से...