अलीगढ़, फरवरी 26 -- (पड़ताल) -50 लाख की फेको मशीन बनी शोपीस, बिना चीरे के ऑपरेशन का सपना अधूरा -15 लाख की पैरामीटर मशीन चार साल से ठप, ग्लूकोमा मरीजों की जांच प्रभावित -18 लाख की यागलेजर बेकार, झिल्ली हटाने को मरीज मजबूरन निजी केंद्रों की ओर अलीगढ़, लोकेश शर्मा। मंडल स्तरीय दीनदयाल अस्पताल में आंखों की रोशनी लौटाने वाली मशीनें खुद अंधेरे में पड़ी हैं। करीब 83 लाख रुपये की ये अत्याधुनिक मशीनें चार साल से धूल फांक रही हैं। बिना चीरे के मोतियाबिंद ऑपरेशन का सपना दिखाने वाली फेको मशीन शोपीस बन चुकी है, तो ग्लूकोमा जांच की पेरिमीटर मशीन और झिल्ली हटाने वाली यागलेजर भी बेकार पड़ी हैं। नतीजा, मरीजों को मजबूरन निजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि जब संसाधन मौजूद हैं तो रोशनी क्यों नहीं? दीनदयाल अस्पताल में नेत्र रोग विभाग को आधुनिक...
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