नई दिल्ली, अगस्त 7 -- हिंदू धर्म पुनर्जन्म की अवधारणा पर आधारित है। शरीर नष्ट होने के बाद भी आत्मा बनी रहती है और नए रूप में जन्म लेती है। मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार की विधि आत्मा को मुक्ति दिलाने के लिए की जाती है। इनमें मुखाग्नि का विशेष महत्व है। यह प्रक्रिया सदियों से चली आ रही है और गरुड़ पुराण में इसका गहन उल्लेख मिलता है।अंतिम संस्कार और सोलह संस्कारों में स्थान हिंदू धर्म में कुल सोलह संस्कार माने गए हैं। इनमें अंतिम संस्कार यानी अंत्येष्टि सबसे महत्वपूर्ण है। यह संस्कार मृत व्यक्ति के परिजनों द्वारा विधि-विधान से पूरा किया जाता है। इसका उद्देश्य आत्मा को शांति और मुक्ति प्रदान करना है, ताकि वह एक शरीर छोड़कर अगले जीवन या लोक में प्रवेश कर सके। बिना सही प्रक्रिया के आत्मा को बाधाएं हो सकती हैं, इसलिए हर कदम शास्त्रों के अनुसार कि...