मेरठ, जुलाई 23 -- श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर पर आषाढ़ की अष्टान्हिका पर्व पर श्री 1008 नंदीश्वर द्वीप महामण्डल विधान में दूसरे दिन मांडले पर 16 अर्घ समर्पित किए गए। सर्वप्रथम श्रद्धालुओं ने शांतिनाथ भगवान का जलाभिषेक व मंगलाष्टक के साथ विधान की क्रियाएं प्रारंभ की। शांतिधारा सुषमा जैन, मनीष जैन, आशीष जैन ने की। विधान की समस्त क्रियाएं पं0 आशीष जैन शास्त्री जी ने संपन्न कराई। मुनि भाव भूषण जी महाराज ने कहा कि अष्टान्हिका महापर्व केवल बाहरी आडंबर, उत्सव या दिखावे का पर्व नहीं है, बल्कि यह अंतर्मन की निर्मलता और आत्मशुद्धि का शाश्वत अवसर है। प्रत्येक जीव में परमात्मा बनने की अनंत शक्ति मौजूद है। सच्ची पूजा वही है जो हमारे विचारों को पवित्र करे और जीवन में करुणा, सदाचार तथा विनम्रता का संचार करे। अनादिकाल से संसारी प्राणी मोह चक्र से ...