नई दिल्ली, मार्च 13 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने फिर दोहराया है कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अंतरिम भरण-पोषण आमतौर पर आवेदन दाखिल करने की तारीख से ही दिया जाना चाहिए, न कि किसी बाद की तारीख से। न्यायालय ने कहा कि विशेष परिस्थितियों में अदालत अलग तरह का आदेश दे सकती है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने टिप्पणी की कि भरण-पोषण की कार्यवाही के निपटारे में होने वाली देरी आमतौर पर व्यवस्थागत होती है। इसका दोष आश्रित पत्नी या बच्चों पर नहीं मढ़ा जा सकता। बिना किसी उचित कारण के इस बीच की अवधि के लिए उन्हें भरण-पोषण से वंचित करना, इस कानून के मूल उद्देश्य को ही विफल कर देगा। पीठ ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश में संशोधन किया, जिसमें एक पत्नी व उसकी दो बेटियों को अंतरिम भरण-पोषण का भुगतान 1 जनवरी, 2019 से करने का नि...