शामली, फरवरी 26 -- शामली। शहर के जैन धर्मशाला में आयोजित प्रवचन सभा में क्रांतिवीर मुनि श्री ने कहा कि जैन दर्शन के अनुसार यदि व्यक्ति के जीवन में दिन-प्रतिदिन उत्कर्ष के स्थान पर अपकर्ष दिखाई देता है, तो उसका मुख्य कारण अंतराय कर्म का उदय होता है। उन्होंने बताया कि जब जीवन में रुकावटें, अवरोध और निरंतर गिरावट अनुभव हो, तो समझना चाहिए कि अंतराय कर्म सक्रिय है। आचार्यश्री ने एक जिज्ञासु के प्रश्न का उत्तर देते हुए स्पष्ट किया कि जैन सिद्धांत में वर्णित आठ कर्मों में से अंतराय कर्म विशेष रूप से प्रगति में बाधा उत्पन्न करता है। इस कर्म के क्षय होने पर ही जीवन में उन्नति, ऊर्जा और सकारात्मक परिवर्तन प्रारंभ होते हैं। स्वास्थ्य के विषय में उन्होंने कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दवाइयों से अधिक भोजन पर नियंत्रण आवश्यक है। आज लोग रोटी कम और ...
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