वाराणसी, अक्टूबर 5 -- वाराणसी। बीएचयू के व्यवहारिक कला विभाग के शोधार्थी हिमेश बाबूलाल और विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष अरोड़ा का संयुक्त शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक राउटलेज-सीआरसी प्रेस की एक अंतरराष्ट्रीय अकादमिक पुस्तक में शामिल किया गया है। शोध में बताया गया है कि जेनेरेटिव एआई किस प्रकार पाठ, चित्र, ध्वनि, वीडियो और अन्य डिजिटल माध्यमों को एक साथ जोड़कर मानव रचनात्मकता, संचार और सूचना-अनुभव के स्वरूप को बदल रही है। यह शोध लेख पुस्तक के छठे अध्याय के रूप में प्रकाशित हुआ है। शोध यह भी रेखांकित करता है कि भविष्य में कलाकार, डिजाइनर और संचार विशेषज्ञ केवल पारंपरिक माध्यमों के निर्माता नहीं होंगे, बल्कि वे मानव विचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों के बीच संवाद स्थापित करने वाले रचनात्मक सहयोगी की भूमिका भी निभाएंगे। यह भी पढ़ें...