बांदा, मई 26 -- अतर्रा। अंतरजातीय विवाहों का समर्थन उचित नहीं है, इससे सामाज में विद्रोह पैदा होता है। सनातक वैदिक परंपराओं की रक्षा होनी चाहिए, देश को वैदिक भारत बनना चाहिए। जो वैदिक जीवन पद्धति है वह मनुष्य मात्र के लिए कल्याणकारी है। पहाड़ों, नदियों को देवतुल्प मनाया है। प्राणी मात्र के प्रति दया का भाव रखना वैदिक संस्कृति है। यह बात गविष्ट यात्रा लेकर मंगलवार को जिले में पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहीं। चित्रकूट से राजापुर होते हुए शंकराचार्य बिसंडा कस्बा पहुंचे। यहां उनके अनुयायियों ने स्वागत किया। यहां उन्होंने कहा मंदिरों से पांच सौ मीटर दूरी पर मांस की बिक्री नहीं होनी चाहिए। यह भी पढ़ें- गौमाता को मिले राष्ट्रमाता का सम्मान इस पर सख्ती से सरकार रोक लगाए। गाय को राष्ट्र माता घोषित किए जाने को लेकर यात्रा पर निकल...