बागपत, अप्रैल 17 -- क्या मंगल ग्रह पर जीवन संभव है? इस सवाल का जवाब खोजने में बागपत के ट्योढ़ी गांव के डॉ. रामकरण का शोध नई दिशा दे रहा है। दरअसल, दिल्ली विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रामकरण ने आईआईटी दिल्ली से पीएचडी की और 14 वर्षों तक अमेरिका, जर्मनी, जापान और सऊदी अरब में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के साथ काम किया। उनकी टीम ने अंटार्कटिका की एक अत्यंत ठंडी झील में ऐसे सूक्ष्मजीवों का अध्ययन किया, जहाँ तापमान माइंस 20 डिग्री सेल्सियस तक रहता है और परिस्थितियाँ मंगल ग्रह जैसी मानी जाती हैं। इनके द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि ये सूक्ष्मजीव अपने प्रोटीन को इस तरह ढाल लेते हैं कि वे इतनी कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रह सकें। यह भी पढ़ें- प्रो. नरेंद्र की पुस्तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित इससे यह संकेत मिलता है कि मंगल पर भ...
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