गंगापार, अप्रैल 6 -- अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में बच्चों को शिक्षा देना आसान नहीं है। ऐसे स्कूलों में प्रवेश शुल्क, शिक्षण शुल्क से लेकर पुस्तक व ड्रेस के नाम पर लूट मची हुई है। शिक्षा विभाग के अधिकारी ऐसे स्कूलों पर लगाम नहीं लगा सके। कुछ शिक्षण संस्थान धन कमानें के लिए प्रति वर्ष पाठ्य पुस्तकों को बदल देते हैं। प्रतिवर्ष पुस्तकों के बदले जाने से अभिभावकों पर तगड़ा बोझ पड़ जाता है। इन शिक्षा संस्थानों की अपनी दुकानें फिक्स हैं, जहां बच्चों के लिए ड्रेस व पुस्तके मिलती हैं, खुले बाजारों की अन्य पाठ्य पुस्तके व ड्रेस ढूढे से नहीं मिल सकती। बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के नाम अभिभावक परेशान है। एक बच्चे का नामांकन व शिक्षण शुल्क सहित दस हजार रूपए नए सत्र में पड़ रहा है। लोग शिकायत तो करते हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं...