अंगों की कमी ही नहीं, परिवार का फैसला और सिस्टम भी बड़ी चुनौती
नई दिल्ली, अगस्त 13 -- नई दिल्ली। भारत दुनिया में कुल अंग प्रत्यारोपण के मामले में तीसरे स्थान पर है, लेकिन मृतक अंगदान की दर अभी भी प्रति दस लाख आबादी पर एक से कम है। विशेषज्ञों के मुताबिक, चुनौती सिर्फ अंगों की कमी नहीं, बल्कि ब्रेन-डेथ की पहचान, परिवार की सहमति, जागरुकता और अस्पतालों की व्यवस्था से भी जुड़ी है। दिल्ली में भी कई मरीज उपयुक्त अंग के इंतजार में हैं। ऐसे में मृतक अंगदान कई मरीजों को जीवन की नई उम्मीद दे सकता है। दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल की नर्सिंग रिसर्चर डॉ. योगिता ने कहा कि शोधों से साफ होता है कि अंगदान को लेकर जागरुकता की कमी अभी भी बड़ी चुनौती है। लोगों को यह जानकारी देना जरूरी है कि ब्रेन-डेथ क्या है, अंगदान की प्रक्रिया कैसे होती है और इससे कितनी जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। वहीं, भारत के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटरों ...
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