प्रयागराज, मार्च 20 -- प्रयागराज, अनिकेत यादव। इलाहाबाद विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों ने एक नई नैनो तकनीक विकसित की है, जो भविष्य में लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में मदद कर सकती है। इस शोध का नेतृत्व भौतिक विज्ञान की प्रो. प्रतिमा चौहान और रसायन विज्ञान के कमलाकांत बेहेरा ने किया। वैज्ञानिकों ने सेलेनियम आधारित बहुत छोटे-छोटे कण (नैनोकण) बनाए हैं। ये कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि शरीर के अंदर जाकर सीधे कोशिकाओं पर काम कर सकते हैं। यही इनकी सबसे बड़ी खासियत है।यह नई तकनीक शरीर में हानिकारक तत्वों को कम करती है और कोशिकाओं को सुरक्षित रखने में मदद करती है। शोध में शामिल डॉ. राहुल के अनुसार, इन नैनोकणों से लिवर के बिगड़े हुए एंजाइम्स को फिर से संतुलित करने में मदद मिली। एंजाइम्स शरीर की जरूरी रासायनिक प्रक्रियाओं को...