लखनऊ , अप्रैल 28 -- अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब उत्तर प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों पर साफ नजर आने लगा है। कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से तारकोल के दामों में तेज उछाल आया है, जिससे सड़क निर्माण की गति धीमी पड़ गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में पिछले डेढ़ महीने के भीतर तारकोल के रेट में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इस अचानक बढ़ोतरी से पुराने रेट पर ठेका लेने वाले ठेकेदारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) के अधिकारी भी मानते हैं कि लागत बढ़ने से निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
निर्माण विभाग के सूत्रों के अनुसार, 1 मार्च 2026 को तारकोल (VG-30) का दाम 46,532 रुपये प्रति टन था। इसके बाद हर पंद्रह दिन में इसमें उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।16 मार्च ko 51,092 रुपये प्रति टन, 1 अप्रैल को 65,002 रुपये प्रति टन और 16 april को 76,152 रुपये प्रति टन हो गया था।
जानकारों के मुताबिक, युद्ध के चलते कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। चूंकि तारकोल पेट्रोलियम उत्पाद का उप-उत्पाद है, इसलिए मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने से इसके दाम लगातार बढ़ रहे हैं।
तारकोल के दाम बढ़ने का सीधा असर सड़क निर्माण की लागत पर पड़ा है। बीसी कार्य, जो सड़क की सबसे ऊपरी परत होती है, उसकी लागत 1 मार्च 2026 को 33,48,609 रुपये प्रति किलोमीटर (7 मीटर चौड़ाई) थी, जो 16 अप्रैल 2026 तक बढ़कर 45,39,653 रुपये प्रति किलोमीटर हो गई।
इसी तरह पीसी (प्रिमिक्स कार्पेट) कार्य, जिसमें करीब 5 इंच मोटी तारकोल मिक्स परत बिछाई जाती है, उसकी लागत भी बढ़ी है। 1 मार्च 2026 को 11,90,856 रुपये प्रति किमी (3.75 मीटर चौड़ाई) जो 16 april को बढ़कर 15,35,696 रुपये प्रति किमीसड़कों की विशेष मरम्मत में आमतौर पर पीसी कार्य ही किया जाता है। किसी भी सड़क के निर्माण में बेस (नींव) और पीसी कार्य बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। बीसी का काम हॉटमिक्स प्लांट से किया जाता है, जबकि पीसी का कार्य मैन्युअल होता है।
अधिकारियों की मानें तो इन दोनों प्रक्रियाओं में तारकोल की जरूरत होती है। इसके बिना बजरी और रोड़ी सड़क पर स्थिर नहीं रह पाती, जिससे सड़क की मजबूती और टिकाऊपन प्रभावित होता है। युद्ध के कारण दामों में आई तेजी को देखते हुए ठेकेदारों ने केंद्र सरकार से राहत देने की मांग की है।
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