नैनीताल , नवम्बर 20 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उधम सिंह नगर जिले में वर्ष 2021 में आपदा पीड़ितों के लिए एकत्र 99 क्विंटल से अधिक खाद्यान्न के रखरखाव के अभाव में सड़ने के मामले में सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी को पेश होने के निर्देश दिए हैं।

हरिद्वार निवासी अभिजीत की ओर से दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में सुनवाई हुई। प्रमुख सचिव और ऊधमसिंह नगर के प्रभारी जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी अदालत में वर्चुअल रूप से पेश हुए।

उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच की जा रही है और स्थिति का पता लगाया जा रहा है। अतिरिक्त जिलाधिकारी ने कहा कि जिलाधिकारी 25 नवम्बर तक अवकाश पर हैं। इसलिए वह उपस्थित नहीं हो पाये। इसके बाद अदालत ने जिलाधिकारी को 26 को पेश होने के निर्देश दे दिए।

याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि खराब खाद्यान्न राशन पुलिस, गैर सरकारी संगठनों और लोगों की ओर से एकत्र किया गया था। रखरखाव के अभाव में सड़ गल कर खराब हो गया। इस मामले की शिकायत शासन को की गई।

इसके बाद खाद्य आयुक्त ने 27 जून 2024 को जांच के आदेश दे दिए। खाद्य उपायुक्त की अगुवाई में गठित समिति ने 13 सितंबर 20024 को जांच रिपोर्ट सौंप दी। समिति ने तत्कालीन जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी (एफएसओ) तेजबल सिंह और एक स्टेनोग्राफर को दोषी ठहराते हुए बाजार मूल्य से वसूली करने की सिफारिश कर दी।

इसके बाद 21 जनवरी 2025 को खाद्य आयुक्त ने एक आदेश पारित कर कहा कि खराब हुआ खाद्यान्न नागरिक आपूर्ति के वितरण के लिए आवश्यक वस्तुओं के रूप में नहीं खरीदा गया था। इसलिए सरकार को वित्तीय हानि नहीं हुई है। इसलिए वसूली नहीं किया जा सकता है। साथ न ही विभागीय कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

आगे कहा गया कि आयुक्त का यह कदम गलत है। याचिकाकर्ता की ओर से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाए।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित