चित्तौड़गढ़ , अगस्त 16 -- केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि देश में 80वां स्वतंत्रता दिवस करोड़ों लोगों के लिए बड़ा परिवर्तन लेकर आया और अस्सी साल बाद बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का अमर गीत फिर से सम्मान प्राप्त कर रहा हैं।

श्री शाह रविवार को चित्तौड़गढ़ के निम्बाहेड़ा में पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा अनावरण के बाद आयोजित अटल गौरव स्मृति समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आजादी के 80 साल के बाद लाल किले की प्राचीर पर और देशभर में जहां ध्वजवंदन हुआ वहां पर श्री बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर कृति राष्ट्र गीत वंदे मातरम का गायन हुआ।

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम बोलते-बोलते हजारों-लाखों लोगों ने आजादी की लड़ाई में गोलियां खाईं, लाठियां खाईं, कई साल जेल में रहे और फांसी के फंदे पर चढ़ गये थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 80 साल के बाद बंकिम बाबू का ये अमर गान अब फिर सम्मान प्राप्त कर रहा है।

उन्होंने कहा कि श्री वाजपेयी का पूरा जीवन राष्ट्र प्रथम की भावना को समर्पित रहा। वह बाल्यकाल से ही राष्ट्रभक्ति के रास्ते पर चले। 40 साल तक विपक्ष में रहने और हर प्रतिकूल परिस्थिति के बावजूद राष्ट्रभक्ति का सिद्धांत ही उनके जीवन का आधार रहा। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने देश के विकास को लेकर कई बड़े फैसले किये। पूरे विश्व के दबाव के सामने न झुकते हुए उन्होंने पोकरण में परमाणु परीक्षण किया।

श्री शाह ने कहा कि श्री वाजपेयी ने हर गांव को सड़क से जोड़ने का काम किया। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के तहत नेशनल हाईवे बनाये। देश के आदिवासियों के लिए उन्होंने पहली बार जनजाति कल्याण मंत्रालय बनाया। इसी का परिणाम है कि आज आदिवासी परिवार की बेटी द्रौपदी मुर्मू देश की राष्ट्रपति हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमेशा आदिवासी कल्याण को आगे बढ़ाया। एसटी कॉम्पोनेंट का बजट 25 हजार करोड़ से बढ़ाकर एक लाख 25 हजार करोड़ तक पहुंचाने का काम किया। भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया। साथ ही देश में 10 आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय और 772 एकलव्य विद्यापीठ बनाने का काम किया। अटलजी ने जो शुरूआत की थी श्री मोदी ने इसको अंजाम तक पहुंचाया है।

उन्होंने राष्ट्र गौरव महाराणा प्रताप को नमन करते हुए कहा कि मेवाड़ की यह वीर भूमि देशभक्तों के लिए काशी से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि इस वीर भूमि के महाराणा प्रताप, वीर पूंजा भील और सेठ भामाशाह की राष्ट्रभक्ति, धर्मभक्ति, स्वराज के प्रति लगन ने मुगलों के विजय रथ को रोक कर रख दिया था। उन्होंने कहा कि राजस्थान में पहले 11 लाख घरों तक ही नल से पानी पहुंचा था। माताएं-बहनें सिर पर तीन-तीन मटकियां लेकर कोसों दूर से पानी लेकर आती थी। श्री मोदी की प्रेरणा से शुरू हुए जल जीवन मिशन से आठ साल में ही राजस्थान में 64 लाख घरों तक पानी पहुंचा है।

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