चमोली , मई, 17 -- उत्तराखंड में जनपद चमोली के समग्र विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से रविवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला योजना समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता ग्राम्य विकास, लघु एवं सूक्ष्म मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी ने की। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 74 करोड़ 23 लाख 70 हजार रुपये की वार्षिक जिला योजना को अनुमोदन प्रदान किया गया।

बैठक से पूर्व जिलाधिकारी गौरव कुमार ने प्रभारी मंत्री का पुष्पगुच्छ एवं शॉल भेंट कर स्वागत किया। प्रभारी मंत्री ने कहा कि जिला योजना में सभी जनप्रतिनिधियों के सुझावों को शामिल किया गया है, जिससे विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष जनपद में अनेक जनहितकारी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हुए और आगामी वर्ष की योजना भी विकास एवं रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभाएगी।

बैठक में लोक निर्माण विभाग, पेयजल, सिंचाई, कृषि, उद्यान, पशुपालन, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पंचायती राज एवं बाल विकास सहित विभिन्न विभागों की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं को क्लस्टर आधारित मॉडल पर लागू किया जाए तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के बेहतर समन्वय से आमजन को अधिकतम लाभ पहुंचाया जाए। साथ ही अधूरे कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए।

कृषि और उद्यान क्षेत्र को बढ़ावा देने पर विशेष जोर देते हुए किसानों को सब्सिडी पर गुणवत्तायुक्त कृषि उपकरण उपलब्ध कराने तथा जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए चैन लिंक फेंसिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। वहीं जनपद में कीवी उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए बड़े क्लस्टर विकसित करने, पैकेजिंग और मार्केटिंग व्यवस्था मजबूत करने पर भी बल दिया गया।

प्रभारी मंत्री ने पशुपालन को पहाड़ की अर्थव्यवस्था का "गेम चेंजर" बताते हुए कहा कि इससे ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने अच्छी नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देने तथा डेयरी, मत्स्य पालन एवं सहकारिता क्षेत्रों में नवाचार आधारित योजनाओं को प्राथमिकता देने की बात कही।

जिला योजना के अंतर्गत सड़क एवं पुल निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग को 6.25 करोड़ रुपये, राजकीय सिंचाई को 5.80 करोड़, लघु सिंचाई को 2.80 करोड़, पेयजल संस्थान को 5.20 करोड़ तथा पेयजल निगम को 2.40 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। इसके अलावा पर्यटन विभाग को 5.10 करोड़, कृषि विभाग को 4.80 करोड़, उद्यान विभाग को 5.05 करोड़ तथा पशुपालन विभाग को 3.65 करोड़ रुपये का परिव्यय अनुमोदित किया गया।

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