पटना , सितंबर 11 -- बाढ़ के प्रकोप को देखते हुए राज्य सरकार के स्तर से प्रभावित 566 ग्राम पंचायतों में युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य किया जा रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग युद्धस्तर पर जुटा हुआ है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार बाढ़ग्रस्त इलाकों में भोजन, ड्राई राशन पैकेट, पशुचारा, बच्चों के लिए पीने का दूध, मरीजों की दवा आदि के वितरण के दायरे में तेजी से विस्तार किया गया है। बिहार के बाढ़ प्रभावित जिलों में राजधानी पटना के साथ भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा एवं अलवल शामिल है। इन जिलों में बाढ़ प्रबंधन की दिशा में एक हजार 221 कम्युनिटी किचन के सहारे अब तक 59 लाख 73 हजार प्रभावित लोगों को भोजन कराया जा चुका है। राज्यभर में संचालित 15 राहत शिविरों में 12 हजार 260 शरणार्थियों के लिए रहने, भोजन और त्वरित चिकित्सा की पुख्ता व्यवस्था की गई है। इसके साथ अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभावितों के बीच 3 लाख 13 हजार पॉलीथीन शीट और 48 हजार 400 से अधिक ड्राई राशन पैकेट का वितरण किया गया है।

विभाग के अनुसार, आपदा के प्रकोप से जूझ रहे लोगों की सहूलियत में राज्य में 1876 सरकारी नावों का संचालन हो रहा है और 10 हजार 823 क्विंटल पशुचारा वितरण के माध्यम से प्रभावित इलाकों में मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि राहत एवं त्वरित बचाव कार्यों के लिए विभिन्न जिलों में एसडीआरएफ की 27 और एनडीआरएफ की 10 टीमें तैनात हैं।

इधर, कई नदियों के जलस्तर स्थिर रहने या घटने की वजह से राहत की उम्मीद भी जगी है। हालांकि वाल्मीकिनगर बराज के पास गंडक और वीरपुर बराज के पास कोसी नदी के जलस्तर में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। डुमरिया घाट पर गंडक, बलतारा और कुर्सेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, पटना के दीघा, गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव एवं मुंगेर में गंगा, श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती, दरौली एवं गंगपुर सिसवन में घाघरा आदि नदियां खतरे के निशान से अभी भी ऊपर बह रही हैं। विभाग स्थिति की नियमित नजर बनाए हुए है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित