उज्जैन , अक्टूबर 09 -- मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि 51 शक्तिपीठों की स्थापना की परिकल्पना व्यापक है। यह केवल माता का मंदिर नहीं होगा, बल्कि समूचे देश को एकात्म करने वाला संकल्प सिद्ध होगा। पितृपक्ष और नवरात्रि के आगमन के समय भगवती के श्रद्धा केंद्र के निर्माण का संकल्प महत्वपूर्ण है। श्री तोमर उज्जैन में आयोजित 51 शक्तिपीठ राष्ट्रीय संगोष्ठी 'शक्तिधाम' के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
'शक्ति, श्रद्धा, शास्त्र और साधना' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में श्री तोमर ने कहा कि जीवन को सार्थक और प्रेरणास्पद बनाने के लिए शक्ति की आराधना, श्रद्धा के साथ समर्पण और शास्त्रों के अध्ययन से ज्ञान प्राप्त करना आवश्यक है। महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए साधना भी जरूरी है। ज्ञान का उद्देश्य केवल उपदेश देना नहीं, बल्कि उसे आचरण में उतारकर जीवन को सार्थक बनाना और देश को प्रगति के पथ पर ले जाना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति से लेकर जिले, राज्य और देश तक, सभी के जीवन को सार्थक बनाने के लिए शक्ति की आराधना और श्रद्धापूर्वक समर्पण आवश्यक है। ज्ञान प्राप्त करने के बाद उसे नियमित अभ्यास और साधना के माध्यम से जीवन में उतारना चाहिए। साधना का लक्ष्य देश को प्रगति के पथ पर आगे ले जाना होना चाहिए।
समारोह के मुख्य वक्ता सुरेश उपाख्य भैय्याजी जोशी थे। इस अवसर पर चिंतक माखन सिंह, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, उज्जैन के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष कमला कुंवर, उपाध्यक्ष शिवानी कुंवर, सिंहस्थ विकास प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल अध्यक्ष ओम जैन तथा उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रवि सोलंकी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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