लखनऊ , जुलाई 16 -- साइबर ठगी के शिकार लोगों को बड़ी राहत देने की दिशा में उत्तर प्रदेश पुलिस ने नई व्यवस्था शुरू करने की तैयारी की है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने गुरुवार को घोषणा की कि 50 हजार रुपये तक की साइबर धोखाधड़ी की राशि पीड़ितों को बिना एफआईआर दर्ज कराए वापस दिलाने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। साइबर फ्राड रोकने के लिए प्रदेश पुलिस 23 बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर कार्य कर रही है।
डीजीपी ने 'ऑपरेशन सीवाई-वज्र' की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि साइबर ठगी की शिकायत मिलने पर संबंधित थाने से 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर पीड़ित का सत्यापन किया जाएगा और उसके बाद धनवापसी की प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत देकर जल्द से जल्द उनकी रकम वापस कराना है।
श्री कृष्ण ने कहा कि उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध के खिलाफ लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि साइबर ठगी की घटनाओं और ठगी की रकम दोनों में कमी आई है तथा प्रदेश साइबर अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक बनाने के लिए लक्षित अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनमें विभिन्न विभागों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा साइबर वॉलंटियर कार्यक्रम के माध्यम से भी लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
डीजीपी ने कहा कि अधिक लाभ का लालच देकर निवेश कराने वाले साइबर ठग सबसे अधिक लोगों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने लोगों से किसी भी निवेश से पहले उसकी पूरी जानकारी लेने तथा संदिग्ध लिंक, कॉल और संदेशों से सतर्क रहने की अपील की। इस मौके पर डीजीपी ने 'ऑपरेशन सीवाई-वज्र' की उपलब्धियां भी साझा कीं।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत एक सप्ताह में 773 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 673 आरोपियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 35(3) के तहत पाबंद किया गया। डीजीपी के अनुसार गिरफ्तार और पाबंद किए गए आरोपियों से जुड़े राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के मामलों में करीब 1,158.70 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। अभियान के दौरान पुलिस ने 3,866 म्यूल बैंक खातों, 17 अवैध कॉल सेंटर, पांच सिम बॉक्स और 11 अवैध सिम विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की। इसके अलावा 53.35 लाख रुपये नकद, 911 मोबाइल फोन, 75 लैपटॉप एवं डेस्कटॉप, 1,270 सिम कार्ड, 648 डेबिट-क्रेडिट कार्ड तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए गए। डीजीपी ने कहा कि साइबर अपराधियों के खिलाफ इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में नागरिकों की सुरक्षा उत्तर प्रदेश पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है और साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए तकनीक, बैंकिंग संस्थानों और विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय को और मजबूत किया जाएगा।
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