लखनऊ , सितम्बर 23 -- रियल एस्टेट क्षेत्र को उपभोक्ता हितैषी व अधिक पारदर्शी बनाने के प्रयासों के क्रम में उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण ने एक और जरुरी कदम उठाया है। इस कदम के तहत 50वां रियल एस्टेट एजेंट प्रशिक्षण सत्र बुधवार को इंडियन लिटरेसी बोर्ड (आईएलबी), कानपुर रोड, लखनऊ में प्रारंभ किया गया। चार दिन का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम रियल एस्टेट एजेंटों को रेरा से जुड़े कानूनों की जानकारी, काम से जुड़ी जरूरी कौशल और नैतिक मूल्यों की समझ देने के लिए आयोजित किया गया है। इस प्रशिक्षण में प्रदेशभर के 50 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं, जो प्रमाणित और पंजीकृत रियल एस्टेट एजेंट बनने की तैयारी कर रहे हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ आईएलबी की निदेशिका संध्या तिवारी द्वारा रेरा के अधिकारीगणों की मौजूदगी में किया गया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रशिक्षण सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध होगा। रेरा सचिव महेंद्र वर्मा ने चार दिवसीय कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा बताते हुए प्रतिभागियों से प्रत्येक सत्र में पूर्ण समर्पण एवं गंभीरता के साथ भाग लेने की बात कही।
अपने उद्घाटन संबोधन में निदेशिका ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र की विश्वसनीयता तीन प्रमुख स्तंभों-प्रमोटर (डेवलपर), रियल एस्टेट एजेंट व रेरा-पर आधारित है। इन तीनों हितधारकों के बीच प्रभावी समन्वय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना व क्षेत्र की सकारात्मक छवि गढ़ने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को सवाल-जवाब के माध्यम से अपनी शंकाएं दूर करने और खुलकर चर्चा करने का अवसर देता है। इसके साथ ही रेरा अधिनियम, अपार्टमेंट ओनरशिप अधिनियम और संपत्ति ट्रांसफर अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण कानूनों की विस्तृत जानकारी भी दी जाती है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य एजेंटों की कानूनी समझ और पेशेवर क्षमता को मजबूत बनाना है, ताकि जानकारी के अभाव में कोई प्रमोटर उनका गलत फायदा न उठा सके।
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