रायपुर, फरवरी 10 -- नक्सलियों के पांच बड़े नेता सात राज्यों के जवानों के लिए चुनौती बने हुए हैं। थीप्परी तिरुपति उर्फ देव जी, पूर्व महासचिव मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति, केंद्रीय समिति सदस्य मिसिर बेसरा (झारखंड), मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम, साउथ जोनल कमांडर पापा राव उर्फ मोंगु (छत्तीसगढ़), इन पांच वांछित नक्सलियों की गिरफ्तारी या मुठभेड़ में मारे जाने बिना नक्सलवाद के खात्मे का ऐलान होना मुश्किल है।
बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज का दावा है कि नक्सलवाद का खात्मा तय समय पर ही होगा।
महासचिव, पूर्व महासचिव, मल्ला राजी रेड्डी और कमांडर पापा राव का नाम लेकर बस्तर रेंज के आईजी पी.सुंदरराज से जब यह पूछा गया कि ये सब मारे जायेंगे या इन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा?अपने जवाब में आईजी ने कहा - सर्च अभियान चलाना हमारा काम है, जंगलों में हम किसी को मारने नहीं जाते हैं, नक्सलियों की गोलियों का जवाब देने के समय ही मुठभेड़ों में नक्सलियों की मौतें होती हैं, सभी नक्सल प्रभावित राज्य समन्वय के साथ नक्सलवाद के खात्मे के लिए लगे हैं।
दक्षिण भारत के नक्सली नेता एक करोड़ के ईनामी मल्ला राजी रेड्डी के बारे में आईजी पी.सुन्दराज ने कहा - उनकी मौत के बारे पुष्ट सूचना नहीं है, साल 2023 में उनकी मौत से जुड़ा फोटो वीडियो वायरल हुआ था।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार (09 फरवरी) को छत्तीसगढ़ के बस्तर में दावा किया कि देश में नक्सलियों की संख्या मुट्ठी भर है। इसी मंच से राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा - दस प्रतिशत नक्सली ही छत्तीसगढ़ में बाकी हैं। इधर,बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार मनीष गुप्ता ने वार्ता को बताया कि राज्य के दो जिलों बीजापुर और सुकमा में नक्सलियों की मौजूदगी है। दंडकारण्य साउथ जोनल कमेटी के कमांडर पापाराव और उसकी टीम के पास जवानों का सामना करने का साहस तो है। माना जाता है कि 50 लाख रुपयों का यह ईनामी नक्सली पापाराव छत्तीसगढ़ का ही है। जनवरी 2025 में कुटरू - बेदरे मार्ग में कमांडर पापा राव के नेतृत्व में नक्सलियों ने आईईडी लगाकर 8 जवानों और एक ड्राइवर की जान ली थी। इस बड़ी घटना के आलावा बहुत सी नक्सल घटनाओं में पापा राव की मौजूदगी रही है। हालिया सम्पन्न मुठभेड़ों के दौरान पापा राव की टीम के नक्सलियों को ढेर करने में जवान सफल रहे हैं, लेकिन दो - तीन मुठभेड़ों में कमांडर पापा राव बच निकलने में कामयाब रहा है।
पोलित ब्यूरो मेंबर मिसिर बेसरा के ऊपर झारखंड ओडिशा और पश्चिम बंगाल की पुलिस ने एक-एक करोड़ रुपयों का ईनाम घोषित कर रखा है। तीन करोड़ का यह ईनामी नक्सली नक्सल प्रभावित राज्यों के पुलिस जवानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।पूर्व महासचिव मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति उम्र दराज और अनुभवी हैं,तकनीकों से लैस किसी भी राज्य की पुलिस को नहीं पता कि पूर्व महासचिव कहां हैं। बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने नक्सली नेताओं के बारे में यह दावा किया कि सभी नक्सल प्रभावित राज्य मिलकर काम कर रहे हैं, ऐसे में नक्सलियों के पास विकल्प नहीं है उन्हें आत्मसमर्पण करना ही होगा,नहीं तो सर्चिंग अभियानों के दौरान उनका मारा जाना तय है।
छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने सोमवार को जगदलपुर में बस्तर पण्डुम 2026 के समापन कार्यक्रम में कहा - जवानों की भुजाओं में इतनी ताकत ही कि वो नक्सलियों का संपूर्ण सफाया कर देंगे।
बीजापुर पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, साल 2024 से अब तक बीजापुर जिले में 35 नवीन सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं। इसी दौरान 918 नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया है,232 नक्सलियों को विभिन्न मुठभेड़ों में मारे गए हैं तथा 1163 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है।
बस्तर रेंज की आईजी की बातों पर इसलिए भरोसा किया जाना चाहिए क्योंकि राज्य के अबूझमाड़ तक से नक्सलियों को खदेड़ा जा चुका है। राज्य के बीजापुर जिले में 60 किलोमीटर लंबा और बीस किलोमीटर चौड़ा एक पहाड़ है। इस पहाड़ का नाम है कर्रेगुट्टालू हिल (केजीएच) इस पहाड़ी इलाके को 21 दिनों के लम्बे ऑपरेशन के बाद सुरक्षा बल के जवानों ने अपने कब्जे में लिया था।21 दिनों (21 अप्रैल से 11 मई 2025) के इस ऑपरेशन में दस हजार से अधिक जवानों ने घेरा था 45 डिग्री के तापमान में, इस ऑपरेशन में 21 दिनों में 21 मुठभेड़ हुई थी,18 जवान घायल हुए थे। जवानों ने इस मुठभेड़ में 31 नक्सलियों को ढेर किया था।
ऑपरेशन के दिनों में भीषण गर्मी के कारण बहुत से जवानों को डीहाइड्रेशन का शिकार होना पड़ा था।18 घायल जवान उच्च चिकित्सा के बाद ठीक हुए इसलिए भी इस ऑपरेशन को छत्तीसगढ़ पुलिस गर्व के साथ बयां करना पसंद करती है।
कर्रगुट्टालू पहाड़ी से 450 आईईडी,35 हथियार (एसएलआर/इंसास राइफल) बरामद किया गया था। इस पहाड़ी से 12000 किलो खाद्य सामग्री की भी बरामदगी हुई थी। इस पहाड़ी के आसपास 350 के आसपास नक्सलियों का ठिकाना था। नक्सलियों का सबसे खतरनाक बटालियन पीएलजीए यहीं से ऑपरेट किया जाता था। इस बटालियन के कमांडर सुकमा निवासी माड़वी हिड़मा को आंध्र प्रदेश की पुलिस ने उसकी पत्नी समेत मार गिराया था।
छत्तीसगढ़ पुलिस और अर्ध सैनिक बलों को यह जानकारी है कि इस पहाड़ी पर कब्जा होना जरूरी है, इसीलिए महीनों की मशक्कत के बाद तीन कैंपों के जरिए इस पहाड़ी पर जवानों ने कब्जा जमाया है। पहाड़ी के सबसे नीचे कैंप बीच में एक और कैंप पहाड़ी के सबसे ऊपर 500 फीट की ऊंचाई पर भी एक कैंप स्थापित किया गया है।26 जनवरी को इस कैंप पर पहली बार तिरंगा फहराया जा सका, इस कैंप और इसके जैसे बहुत से कैंपों की वजह से इस साल छत्तीसगढ़ में 70 नए स्थानों पर तिरंगा लहराया जा सका।25 जनवरी 2026 को इस कैंप के आसपास आईईडी ब्लास्ट के कारण 13 जवान घायल हुए थे।
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