कुशीनगर , सितम्बर 27 -- कुशीनगर जिले के अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन केंद्र कुशीनगर में 47 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया जाएगा। प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 40 लाख लीटर सीवरेज से आने वाले गंदे पानी को उपचारित करने की होगी। इसके लिए निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होते ही कार्यदायी संस्था सीएनडीएस निर्माण कार्य शुरू करेगी।
एसटीपी के लिए नेशनल हाईवे के समीप हिरण्यवती नदी के किनारे नगरपालिका की करीब पांच एकड़ खाली भूमि चिह्नित की गई है। परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद नगर से निकलने वाले गंदा पानी वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जा सकेगा।
इससे नदी और नालों में सीधे गंदा पानी जाने पर रोक लगेगी और पर्यावरण के साथ भूजल की गुणवत्ता को भी संरक्षण मिलेगा। सबसे बड़ी बात कि बुद्ध स्थली की ऐतिहासिक व धार्मिक पहचान से जुड़ी हिरण्यवती नदी का आंचल (पानी) मैला होने से बचेगा।
नगरपालिका क्षेत्र में करीब 1.60 लाख की आबादी 27 वार्डों में रहती है। यहां प्रतिदिन लगभग 40 टन ठोस कचरा निकलता है।
बढ़ती आबादी और पर्यटन गतिविधियों के बीच ठोस कचरे के साथ सीवरेज का वैज्ञानिक प्रबंधन भी नगर के लिए बड़ी आवश्यकता बन चुका है। एसटीपी के निर्माण से दूषित पानी उपचारित होगा। नगरपालिका प्रशासन पिछले दो वर्षों से इस परियोजना को प्रयासरत था।
सीएनडीएस और नगरपालिका प्रशासन की संयुक्त टीम ने नगर के विभिन्न वार्डों में सर्वे कर जनसंख्या, सीवरेज जल की मात्रा, नालियों में पानी के बहाव और प्रस्तावित प्लांट के लिए भूमि की उपलब्धता का अध्ययन किया। इसके आधार पर डीपीआर तैयार कर शासन को भेजा गया।
शासन की टीमों ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण, तकनीकी और वित्तीय परीक्षण किया। इसके बाद डीपीआर को अंतिम स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया गया। वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद निविदा प्रक्रिया भी पूरा कर ली गई है। जल्द ही परियोजना धरातल पर दिखाई देगी।
एसटीपी में सबसे पहले ग्रिट चैंबर के माध्यम से सीवरेज जल से प्लास्टिक, रेत, मिट्टी और अन्य ठोस कचरे को अलग किया जाएगा। इसके बाद जैविक प्रक्रिया के माध्यम से पानी में घुले हानिकारक कार्बनिक पदार्थों का उपचार किया जाएगा। अंतिम चरण में क्लोरीनीकरण के माध्यम से पानी को रोगाणुमुक्त किया जाएगा।
उपचारित पानी को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित तरीके से उपयोग अथवा जल स्रोत में छोड़ा जा सकेगा। उपचारित पानी का इस्तेमाल बागवानी, सिंचाई, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे कार्यों में भी किया जा सकता है। इस संबंध में किरण राकेश जायसवाल, नगरपालिका अध्यक्ष, कुशीनगर ने बताया कि जल्द ही इसका कार्य धरातल पर दिखाई देगा। परियोजना पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है और इससे नगरवासियों को स्वच्छ वातावरण भी मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन स्थल होने के कारण कुशीनगर में सीवरेज प्रबंधन की यह परियोजना बेहद आवश्यक थी।
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