फिरोजाबाद , सितंबर 25 -- जैन समाज के दशलक्षण महापर्व का शुक्रवार को धार्मिक उल्लास और भक्ति के साथ समापन हुआ। महापर्व के अंतिम दिन नगर के सभी 44 जिनालयों में दसवें लक्षण उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके साथ ही दसवें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ का निर्वाण महोत्सव मनाया गया। श्रद्धालुओं ने रत्नत्रय धर्म के तहत सम्यक ज्ञान की भी सामूहिक रूप से आराधना की।

सूर्योदय से पहले ही शहर के जिनालयों में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सफेद वस्त्र धारण कर मंदिरों में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार विभिन्न जिनालयों की पैदल वंदना की। मंदिरों में घंटे-घड़ियालों की ध्वनि और भगवान के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।

धर्मसभा में वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने कहा कि उत्तम ब्रह्मचर्य जीवन का सर्वोच्च सोपान है। इंद्रियों को संयमित रखकर आत्मा के निज स्वरूप में लीन होना ही सच्चा ब्रह्मचर्य है। शुद्ध आचरण मनुष्य को देवत्व की ओर ले जाता है।

गुरु मां आर्यिका श्री विजय मती माता जी ने कहा कि सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र मोक्ष मार्ग की आधारशिला हैं। जीवन में संयम और सम्यक ज्ञान का प्रकाश होने पर ही आत्मकल्याण संभव है। दशलक्षण पर्व का समापन पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि संयम को जीवन में अपनाने का संकल्प है।

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