चंडीगढ़/ जालंधर , जून 05 -- वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 स्वरूपों की चोरी से जुड़े मामले में एक आरोपी की जमानत मंजूर होने पर पंजाब सरकार की कड़ी आलोचना की और इसे सरकार की अक्षमता, लापरवाही और बेअदबी से जुड़े मामलों के प्रति गंभीरता की कमी का प्रमाण बताया।
श्री खैरा ने कहा कि थाना सी-डिवीजन, अमृतसर में सात दिसंबर को दर्ज प्राथमिकी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 स्वरूपों की चोरी और अन्य गंभीर आरोप शामिल हैं, के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अमृतसर ने 16 अप्रैल को आरोपी की जमानत मंजूर कर ली। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्धारित कानूनी अवधि के भीतर पुलिस द्वारा चालान (चार्जशीट) दाखिल न किये जाने के कारण आरोपी को यह राहत मिली। उन्होंने कहा कि यह जांच एजेंसियों की गंभीर विफलता को दर्शाता है और पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। श्री खैरा के अनुसार, सरकार लगातार बेअदबी मामलों में न्याय दिलाने के दावे करती है, लेकिन इतने संवेदनशील मामले में समय पर चार्जशीट दाखिल कराने में भी असफल रही।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार के दोहरे मापदंड उजागर हो गये हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से जुड़े गंभीर मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही, वहीं दूसरी ओर हाल ही में टांडा के एक युवक को आम आदमी पार्टी के चुनाव चिह्न 'झाड़ू' की कथित बेअदबी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा हाल ही में नयी बेअदबी विरोधी कानून के नाम पर निकाली गयी 'शुक्राना यात्रा' केवल एक राजनीतिक दिखावा साबित हुई है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग की कि वे पंजाब और सिख समुदाय को बताएं कि इतने गंभीर मामले में यह चूक कैसे हुई। साथ ही उन्होंने समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल न करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
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