अमृतसर , मई 26 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने 328 पावन स्वरूपों के मामले की जांच के लिए पंजाब सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाये हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईटी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर शिरोमणि कमेटी के प्रशासनिक और आंतरिक मामलों में गैर-जरूरी दखल देरही है।
मंगलवार को यहां जारी बयान में एडवोकेट धामी ने कहा कि जांच के नाम पर सिखों की प्रमुख धार्मिक संस्था की संवैधानिक पहचान और अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी ने शुरुआत से ही पूरी पारदर्शिता और गंभीरता के साथ एसआईटी को सहयोग दिया है। श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों को ध्यान में रखते हुए जांच टीम को हर जरूरी जानकारी और सहायता उपलब्ध करवायी गयी, लेकिन इसके बावजूद एसआईटी अब कमेटी के आंतरिक और प्रशासनिक मामलों को अपने एजेंडे का हिस्सा बना रही है।
एडवोकेट धामी ने आरोप लगाया कि एसआईटी लगातार ऐसी जानकारियां मांग रही है, जिनका 328 पावन स्वरूपों के मामले से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी के वित्तीय खातों, बैंक लेन-देन और आर्थिक विवरणों की मांग करना एसआईटी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने कहा कि कभी एसआईटी के प्रतिनिधियों को बैंकों में भेजकर खातों की जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है, तो कभी पत्र भेजकर विस्तृत वित्तीय रिकॉर्ड मांगे जा रहे हैं। इसके अलावा निजी चैनलों ईटीसी और ज़ी नेक्स्ट मीडिया के साथ गुरबाणी कीर्तन प्रसारण को लेकर हुए पुराने समझौतों का ब्यौरा भी मांगा जा रहा है, जबकि इसका इस मामले से कोई संबंध नहीं है।
एसजीपीसी अध्यक्ष ने कहा कि कई जानकारियां पहले ही एसआईटी को दी जा चुकी हैं, लेकिन उन्हें बार-बार दोबारा पत्र भेजकर वही जानकारी फिर मांगी जा रही है। उन्होंने कहा कि एसआईटी के सवाल और तरीके इस ओर संकेत करते हैं कि जांच टीम मूल जांच से हटकर किसी अन्य उद्देश्य के तहत काम कर रही है।
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