कोलकाता , नवंबर 05 -- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुरुवार से शुरू हो रहे 31वें कोलकाता अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (केआईएफएफ)का उद्घाटन करेंगी और यह आयोजन राजधानी की सिल्वर स्क्रीन तथा शहर को सिनेमा उत्सव में बदल देगा।

धोनो धन्या ऑडिटोरियम में आयोजित और सप्ताह भर चलने वाले इस महोत्सव में दिग्गज कलाकार शर्मिला टैगोर, शत्रुघ्न सिन्हा और प्रतिष्ठित फिल्म निर्माता रमेश सिप्पी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। इस साल के उद्घाटन समारोह में उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन की कालजयी रोमांटिक क्लासिक "सप्तपदी" की विशेष स्क्रीनिंग होगी, जो बंगाल के सिनेमा के स्वर्णिम युग को श्रद्धांजलि देगी।

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (एफआईएपीएफ) बेल्जियम द्वारा मान्यता प्राप्त यह महोत्सव 39 देशों की, 18 भारतीय और 30 विदेशी भाषाओं की फिल्मों को एक साथ लाएगा, जिनकी स्क्रीनिंग शहर के 21 स्थानों पर की जाएगी। इस महोत्सव में प्रतियोगिता श्रेणियों में 43 फीचर फिल्में, 19 लघु फिल्में और 10 वृत्तचित्रों के साथ-साथ 143 गैर-प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन भी होंगे।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता (चलती छवियों में नवाचार) में सर्वश्रेष्ठ फिल्म और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए रॉयल बंगाल टाइगर ट्रॉफी प्रदान की जाएगी, जबकि अन्य प्रतिष्ठित श्रेणियों में हीरालाल सेन मेमोरियल ट्रॉफी, एफआईपीआरईएससीआई पुरस्कार और नेटपैक पुरस्कार शामिल हैं।

इस वर्ष मुख्य फोकस देश पोलैंड है जिसका प्रतिनिधित्व 19 फिल्मों के माध्यम से किया जाएगा, जिनमें समकालीन और क्लासिक दोनों तरह की कृतियाँ शामिल हैं। इनमें अग्निस्का हॉलैंड की "फ्रांज", क्रिज़्सटॉफ़ कीस्लोव्स्की की "द डबल लाइफ ऑफ़ वेरोनिक" और व्लादिस्लाव स्लेसिकी की "इन डेजर्ट एंड वाइल्डरनेस" और टोमेक पोपाकुल की 'विंटर' जैसी एनिमेटेड फिल्में शामिल हैं।

'बंगाली पैनोरमा' खंड में ऋत्विक घटक की उत्कृष्ट कृतियाँ 'कोमल गांधार' और 'सुवर्णरेखा' के साथ-साथ 'बारी ठेके पालिये' और 'पिंजर' जैसी फिल्में भी प्रदर्शित की जाएँगी। 1950 के दशक की फिल्म आनंद मठ की स्क्रीनिंग भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित की जाएगी, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम की भावना और प्रदीप कुमार की जन्मशती दोनों को श्रद्धांजलि होगी। स्क्रीनिंग के अलावा महोत्सव में शिशिर मंच और बांग्ला अकादमी में सेमिनार और व्याख्यान आयोजित किए जाएँगे जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सिनेमा का भविष्य, गुरु दत्त: एक उदासीन और गैर अनुरूपतावादी व्यक्तित्व- विस्थापन एवं प्रवास जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

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