वाराणसी , सितंबर 2 -- बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए योगी सरकार ने तकनीक को राहत और बचाव की रणनीति का अहम हिस्सा बनाया है। काशी में तैयार किए गए '3-डी अर्बन स्पेशियल डिजिटल ट्विन' और जीआईएस तकनीक के जरिए बाढ़ के संभावित प्रभाव का पूर्व आकलन किया जा रहा है।

इससे जलस्तर बढ़ने पर प्रभावित होने वाले क्षेत्रों, जलभराव की आशंका वाले स्थानों और संभावित रूप से प्रभावित घरों की पहचान पहले ही की जा सकती है।

अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. सदानंद गुप्ता ने बुधवार को बताया कि बाढ़ की स्थिति में समय पर सटीक जानकारी मिलना राहत और बचाव कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है। डिजिटल ट्विन से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर प्रशासन राहत-बचाव की योजना, संसाधनों की तैनाती और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक व्यवस्थाओं को पहले से तय कर सकता है।

वाराणसी स्मार्ट सिटी के मुख्य महाप्रबंधक अमरेंद्र तिवारी के अनुसार, काशी के करीब 160 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की थ्री-डी मैपिंग की गई है, जिसमें 100 से अधिक थीमैटिक लेयर शामिल हैं। लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (लिडार) तकनीक से तैयार डिजिटल मॉडल क्षेत्र की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराता है।

स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. संतोष कुमार त्रिपाठी ने बताया कि लाइट एयरक्राफ्ट, बैग पैक और वाहनों के माध्यम से थ्री-डी जीआईएस मैपिंग कर काशी की गलियों, प्रमुख सड़कों और अन्य क्षेत्रों का डेटा डिजिटल स्वरूप में तैयार किया गया है। इस आधार पर विकसित कस्टमाइज्ड सॉफ्टवेयर का उपयोग आपदा प्रबंधन के साथ शहरी विकास की योजनाओं में भी किया जा सकता है।

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