नयी दिल्ली , सितंबर 18 -- केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक देश को खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) रोग से पूरी तरह मुक्त कराने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में चलाए जा रहे व्यापक अभियानों में अब तक एफएमडी रोधी टीकों की 147.16 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी है, जिससे देश के लगभग 8.04 करोड़ किसानों को फायदा मिला है।
यहां जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गयी। इसमें बताया गया कि राष्ट्रीय पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के प्रयासों के चलते एफएमडी प्रकोपों की संख्या 2019 के 132 मामलों से घटकर 2025 में 40 तथा अगस्त 2026 तक मात्र 20 रह गई है। इसके साथ ही, वर्ष 2025 में एनएसपी एंटीबॉडी पॉजिटिविटी दर भी घटकर 8.1 प्रतिशत पर आ गई है।
इन उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए और एफएमडी -मुक्त ज़ोन विकसित करने के उद्देश्य से, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने 'विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन' के सहयोग से तीन दिवसीय पीवीएस-पीपीपी लक्षित सहायता कार्यशाला का आयोजन किया। राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में आयोजित इस कार्यशाला में 12 राज्यों के पशुपालन विभागों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य स्तरीय कार्य योजनाओं को मजबूत और सार्वजनिक-निजी भागीदारी से देश में एफएमडी-मुक्त जोन तैयार करना था।
कार्यशाला का उद्घाटन पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार ने पशुपालन आयुक्त डॉ. नवीना बी. महेश्वरप्पा और आईसीएआर व वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में किया। श्री गंगवार ने इस मौके पर कहा कि विभाग ने एफएमडी के मामले में विस्तृत दिशा-निर्देश और 2025 में 'पशु चिकित्सा अवसंरचना के न्यूनतम मानक' तैयार किए हैं। राज्यों की बुनियादी ढांचे संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए वित्तीय मदद दी जा रही है।
इस आयोजन में विशेषज्ञों ने अंतर्राष्ट्रीय मानकों और ब्राजील के सफल अनुभवों को साझा किया। नौ प्राथमिकता वाले राज्यों के प्रतिनिधियों ने सार्वजनिक व निजी हितधारकों के साथ मिलकर निगरानी, टीकाकरण, प्रयोगशाला तैयारी और मूवमेंट कंट्रोल से जुड़ी अपनी राज्य-स्तरीय कार्य योजनाओं को अंतिम रूप दिया।
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