चेन्नई , फरवरी 16 -- तमिलनाडु वर्ष 2030 तक एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (एक लाख करोड़ डॉलर) की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को हासिल कर सकता है, बशर्ते वह मौजूदा विकास दर को बनाए रखे और रुपये के मुकाबले डॉलर के मूल्य में वृद्धि का रुझान जारी रहे।
यह आकलन तमिलनाडु आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में किया गया है। सर्वे में कहा गया है कि यह उपलब्धि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
सर्वेक्षण के अनुसार, यदि राज्य 2024-25 की 16 प्रतिशत नाममात्र (नॉमिनल) वृद्धि दर को बरकरार रखता है और मध्यम अवधि में डॉलर के मूल्य में प्रतिवर्ष 2 प्रतिशत की वृद्धि मान ली जाए, तो तमिलनाडु 2031 तक एक ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा छू सकता है। यदि डॉलर में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो यह लक्ष्य एक वर्ष और आगे खिसक सकता है।
विश्व बैंक के अनुसार, 2024-25 के लिए उच्च आय वाले देशों की प्रति व्यक्ति आय की सीमा 14,006 अमेरिकी डॉलर निर्धारित है। 1997-98 में यह सीमा 9,646 डॉलर थी और तब से इसमें औसतन 176.33 डॉलर प्रतिवर्ष की वृद्धि हुई है। इसी प्रवृत्ति के आधार पर अनुमान है कि 2047-48 तक यह सीमा लगभग 18,414 डॉलर तक पहुंच सकती है। हालांकि 2034-35 के लिए यह सीमा 16,122 डॉलर और 2035-36 के लिए 16,298 डॉलर आंकी गई है।
2024-25 में तमिलनाडु का प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी ) 4,763 डॉलर रहा, जो इसे उच्च-मध्यम आय वर्ग (4,516-14,500 डॉलर) की श्रेणी में रखता है। मौजूदा 15.98 प्रतिशत नाममात्र वृद्धि दर के साथ राज्य 2034-35 तक उच्च आय देश की सीमा (16,122 डॉलर) को पार करने की दिशा में अग्रसर है।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि मजबूत निवेश, निर्यात विविधीकरण और विस्तार, तथा प्राथमिक क्षेत्र विशेषकर फसल क्षेत्र के पुनरुत्थान से 2025-26 में वृद्धि दर और तेज होने की उम्मीद है।
साथ ही, सरकार की प्रमुख रणनीतियों में 2030 तक निर्यात को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य शामिल है। राज्य की मजबूत निर्यात गति को देखते हुए, हाल में अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क वृद्धि जैसे अस्थायी चुनौतियों के बावजूद, तमिलनाडु इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अग्रसर दिख रहा है।
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