लखनऊ , अप्रैल 4 -- उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही सियासी दलों ने अपनी रणनीति के तहत बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक दिलचस्प घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर मेरठ की सरधना सीट पर अपनी दावेदारी ठोककर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
यह कवायद ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के दो प्रभावशाली नेताओं पूर्व सरधना विधायक संगीत सोम और पूर्व मुजफ्फरनगर सांसद संजीव बालियान के बीच तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है।
दरअसल, 2022 के विधानसभा चुनाव में सरधना सीट से सोम की हार के बाद यह विवाद शुरू हुआ था। ठाकुर समुदाय से आने वाले सोम ने जाट नेता बालियान पर आरोप लगाया था कि उन्होंने चुनाव के दौरान उनके पक्ष में जाट वोटों का ध्रुवीकरण नहीं कराया। उस चुनाव में सोम को समाजवादी पार्टी के अतुल प्रधान ने हराया था, जो गुर्जर समुदाय से आते हैं। इसके जवाब में बालियान ने भी पलटवार करते हुए सोम पर हरेंद्र मलिक की मदद करने का आरोप लगाया। मलिक ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर सीट से बालियान को शिकस्त दी थी। सरधना विधानसभा क्षेत्र इसी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
हाल ही में सरधना में 18वीं सदी के जाट शासक महाराजा सूरजमल की प्रतिमा के अनावरण के दौरान बालियान के बयान ने इस विवाद को और हवा दे दी। उन्होंने 2024 की हार को 'अपमान' बताते हुए 'ब्याज समेत बदला' लेने की बात कही थी। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन सियासी हलकों में इसे सोम पर निशाना माना गया था ।
इसी पृष्ठभूमि में रालोद ने मेरठ की कम से कम तीन सीटों सरधना, सिवालखास और किठौर को लेकर भाजपा से बातचीत शुरू की है। गौरतलब है कि 2022 में ये तीनों सीटें भाजपा हार गई थी। उस समय रालोद समाजवादी पार्टी की सहयोगी थी और सिवालखास सीट रालोद के खाते में गई थी, जबकि किठौर से सपा उम्मीदवार विजयी रहे थे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरधना सीट रालोद को देने से भाजपा को सोम और बालियान के बीच चल रही खींचतान को संतुलित करने का रास्ता मिल सकता है।
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