पटना , अक्टूबर 21 -- ारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस ) 2025 बैच के परीक्ष्यमान पदाधिकारियों के लिए सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त से संबंधित 10 दिवसीय प्रशिक्षण की शुरुआत बुधवार को राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान, शास्त्रीनगर, पटना में हुई। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन बिपार्ड के महानिदेशक अरविंद कुमार चौधरी, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह, भू अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक सुहर्ष भगत तथा संस्थान के प्राचार्य दिव्य राज गणेश ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए बिपार्ड के महानिदेशक अरविंद कुमार चौधरी ने कहा कि सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त का प्रशिक्षण सभी प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य में वर्तमान में सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है। ऐसे में इस विषय की गहरी समझ उनके पूरे प्रशासनिक करियर में उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा कि राजस्व प्रशासन राज्य सरकार के कामकाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए अधिकारियों को सर्वेक्षण के मूलभूत सिद्धांतों की जानकारी होना जरूरी है।
श्री चौधरी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को सलाह दी कि वे प्रशिक्षण के दौरान हर विषय को गंभीरता से समझें और कार्यों को स्वयं करके सीखने का प्रयास करें। कुछ भी पूछना हो तुरंत पूछें। फील्ड में जाने पर आम लोगों से सीधे संवाद करें और उनकी समस्याओं को समझें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान सीखने और अनुभव प्राप्त करने के लिए पर्याप्त समय मिलता है, जिसका लाभ अधिकारियों को उठाना चाहिए।
श्री चौधरी ने संपत्ति विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में संपत्ति विवाद से जुड़ी बहुत अधिक घटनाएं सामने आती हैं। स्पष्ट और सटीक भूमि अभिलेख ऐसी समस्याओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भूमि से संबंधित विवादों के समाधान में अभिलेखों की स्पष्टता बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने अमेरिका की डिजिटल व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां डिजिटल माध्यम से बैठकर ही किसी संपत्ति की जानकारी प्राप्त करना और उसे खरीदने की प्रक्रिया आगे बढ़ाना संभव है। राज्य का राजस्व प्रशासन भी डिजिटल व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रशिक्षण की बेहतर व्यवस्था के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों की सराहना भी की। सचिव श्री जय सिंह की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्व के विशेषज्ञ अफसरों में ये हैं। आप सभी इस अवधि में इनसे लाभ उठा सकते हैं।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने कहा कि राज्य में राजस्व से जुड़े कार्यों को डिजिटल माध्यम से संचालित करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि करीब दस वर्ष पहले तक झोले में लेकर चलने वाले राजस्व संबंधी कार्य अब लैपटॉप तक पहुंच गए हैं। यह बदलाव राजस्व प्रशासन में तकनीक के बढ़ते उपयोग को दर्शाता है।
श्री सिंह ने कहा कि सर्वेक्षण का कार्य सही ढंग से पूरा होने के बाद भूमि से संबंधित रिकॉर्ड अधिक स्पष्ट और डिजिटल होंगे। इससे राजस्व प्रशासन को मजबूती मिलेगी और यह राज्य की विकास यात्रा में मील का पत्थर साबित होगा।
भू अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक सुहर्ष भगत ने प्रशिक्षु अधिकारियों को 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा और प्रशिक्षण देने वाले विशेषज्ञों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों से प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने की अपील की।
कार्यक्रम की शुरुआत में सभी प्रशिक्षु अधिकारियों का परिचय भी प्राप्त किया गया।
इस अवसर पर सहायक निदेशक सुबोध कुमार, अनुदेशक विनय कुमार राय, सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी श्रीमती पल्लवी और श्रीमती ऐमन फातिमा समेत अन्य उपस्थित थे।
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