पटना , जून 20 -- मजनों को अब जमीन-जायदाद संबंधी दस्तावेजों की सर्टिफाइड कॉपी घर बैठे देखने और डाउनलोड करने की सुविधा मिल गई है। फिलहाल यह व्यवस्था 1996 से 2026 तक के दस्तावेजों पर लागू है। राज्यभर में निबंधित हुए इस अवधि के दस्तावेज पूर्ण रूप से विभाग के पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की महत्वपूर्ण पहल से पुराने निबंधित अभिलेखों के संरक्षण और जनसुविधा के लिए राज्यभर के निबंधित अभिलेखों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है। इस क्रम में 2006 से 2024 तक के लगभग 47 लाख 55 हजार दस्तावेजों के पीडीएफ अपलोड किए जा चुके हैं, जिससे आम लोग अब इन दस्तावेजों की सर्टिफाइड कॉपी को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

भूमि रिकॉर्ड को पूरी तरह पारदर्शी करने के लिए विभाग 1908 से 1995 तक की अवधि के दस्तावेजों का डिजिटलीकरण कर रहा है। इस अवधि के कुल 5 करोड़ 28 लाख दस्तावेजों में से 8 लाख 40 हजार दस्तावेज पूर्ण रूप से डिजिटाइज्ड हो चुके हैं। इसके अलावा 4 करोड़ 29 लाख दस्तावेजों के पीडीएफ तैयार किए गए हैं, जिनके ऑनलाइन अपलोड करने की प्रक्रिया जारी है। इसके लिए वर्तमान में 10 एजेंसियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। डिजिटलीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन दस्तावेजों को आमजन के लिए सार्वजनिक कर दिया जाएगा।

यह डिजिटल पहल न केवल आम लोगों को पुराने जमीन दस्तावेजों को घर बैठे देखने और डाउनलोड करने में सहायक साबित होगी, बल्कि जमीन संबंधी फर्जी दस्तावेजों, विवादों और धोखाधड़ी पर भी प्रभावी अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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