अमृतसर , नवंबर 01 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने नवंबर 1984 में देश के विभिन्न हिस्सों में हुए सिख नरसंहार को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के माथे पर कलंक करार देते हुए कहा है कि चार दशक से अधिक समय बीतने के बावजूद पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल सका है।

नवंबर 1984 के दौरान मारे गए सिखों को श्रद्धांजलि देते हुए रविवार को जारी बयान में श्री धामी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के संरक्षण में एक नवंबर से करीब एक सप्ताह तक सिखों पर अमानवीय अत्याचार किए गए और बड़ी संख्या में सिख पुरुषों, महिलाओं तथा बच्चों की निर्मम हत्या की गई। उन्होंने कहा कि यह मानवता के खिलाफ ऐसा जघन्य कृत्य था, जिसने दुनिया के संवेदनशील लोगों को झकझोर दिया था। इस नरसंहार के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए थी लेकिन धामी के अनुसार, कांग्रेस ने न्याय सुनिश्चित करने के बजाय आरोपों का सामना कर रहे नेताओं को संरक्षण दिया और उन्हें बड़े राजनीतिक पदों से नवाजा।

एसजीपीसी अध्यक्ष ने कहा कि देश की आजादी में सिख समुदाय ने महत्वपूर्ण कुर्बानियां दीं लेकिन इसके बावजूद उसे बार-बार अन्याय का सामना करना पड़ा। नवंबर का महीना आते ही नरसंहार के पीड़ित परिवारों और पूरे सिख समुदाय के पुराने जख्म फिर हरे हो जाते हैं। उन्होंने सरकारों से पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और नरसंहार के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि न्याय की यह लड़ाई केवल पीड़ित परिवारों की नहीं, बल्कि मानवाधिकारों, लोकतांत्रिक मूल्यों और न्याय व्यवस्था में लोगों के विश्वास से भी जुड़ी है।

धामी ने कहा कि जब तक दोषियों को उनके किए की सजा नहीं मिलती, तब तक पीड़ित परिवारों को संतोष नहीं मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस दर्दनाक घटना में मारे गए लोगों की स्मृति में दो नवंबर को श्री दरबार साहिब परिसर में श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद अरदास की जाएगी।

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