जयपुर , जून 15 -- राजस्थान में डायरिया यानी दस्त रोग से बचाव, उपचार के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा 16 जून से 31 जुलाई तक स्टॉप डायरिया अभियान संचालित किया जायेगा।
विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि इस अभियान के तहत विशेषकर पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में डायरिया की रोकथाम, समय पर उपचार, स्वच्छता, स्वच्छ पेयजल और जन-जागरूकता के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जायेगी।
उन्होंने बताया कि देश में डायरिया आज भी बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी एक गंभीर चुनौती है। गर्मियों एवं बारिश के मौसम में बच्चे दस्त रोग से अधिक ग्रसित होते हैं एवं उपचार नहीं होने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर प्रदेशभर में स्टॉप डायरिया अभियान संचालित होगा और इस दौरान 'स्वच्छ जल, समुचित उपचार डायरिया से बचें हर बार' की थीम पर विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जायेगी।
श्रीमती राठौड़ ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य डायरिया की रोकथाम एवं उपचार से जुड़ी सेवाओं को और सुदृढ़ करना है। विभिन्न क्षेत्रों के आपसी सहयोग के माध्यम से डायरिया की रोकथाम, प्रबंधन एवं प्रभावी उपचार संबंधी उपायों को और मजबूत बनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस अवधि में विभागीय समन्वय बैठकें आयोजित करते हुए आमजन को जागरुक करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार गतिविधि आयोजित करने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पेयजल एवं स्वच्छता, शहरी कार्य, ग्रामीण विकास आदि विभागों को भी चिकित्सा विभाग के साथ आवश्यक सहयोग करने के लिए निर्देशित किया गया है।
मिशन निदेशक एनएचएम जोगाराम ने बताया कि इस अभियान में बच्चों में दस्त से बचाव के लिए जन्म के उपरांत पहले छह माह तक शिशु को केवल मां का ही दूध दिया जाना, टीकाकरण (विशेष रूप से रोटावायरस के विरुद्ध), स्वच्छ पेयजल का सेवन, साबुन से हाथ धोने, साफ-सफाई तथा उपचार के लिए सभी स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों और आंगनवाड़ी केंद्रों में ओआरएस-जिंक कॉर्नर स्थापित किये गये हैं।
उन्होंने बताया कि समुदाय में साफ शौचालयों का उपयोग, सैनेटरी अपशिष्ट सहित कचरे का सुरक्षित निपटान, पीने के पानी की जांच (विशेषकर डायरिया प्रभावित क्षेत्रों में), तथा गांवों में स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण समिति एवं ग्राम पंचायत एवं ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों की संयुक्त बैठकें भी आयोजित की जायेंगी।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत समुदाय में जागरूकता बढ़ाने के लिए राशन की दुकान, स्वयं सहायता समूहों, सामुदायिक रेडियो और नुक्कड़ नाटकों जैसे माध्यमों का भी उपयोग किया जाएगा।
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