शिमला , फरवरी 01 -- हिमाचल प्रदेश को 16वें वित्त आयोग के तहत 2026-27 से 2030-31 के दौरान केंद्र से लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये मिलने की संभावना है जो पिछले वित्त आयोग की तुलना में केंद्र से मिलने वाली रकम में बड़ी बढ़ोतरी का संकेत है।
यह अनुमान पहले वर्ष के आवंटन और करों के बंटवारे तथा अनुदानों (ग्रांट्स-इन-एड) के मौजूदा रुझानों के आधार पर लगाया गया है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश 2026-27 के बजट अनुमान के अनुसार, हिमाचल प्रदेश को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में लगभग 13,950 करोड़ रुपये मिलने का प्रावधान किया गया है। राज्यों को करों के विभाज्य पूल से 41 प्रतिशत हिस्सेदारी जारी रहने के आधार पर यह आंकड़ा तय किया गया है, जिसे पूरे पांच साल की अवधि के लिए गणना का आधार माना गया है। यदि केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में सालाना औसतन 8 प्रतिशत वृद्धि मान ली जाए, तो 2026-27 से 2030-31 के बीच केवल करों के बंटवारे से ही हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली कुल राशि 81,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किए जाने के तुरंत बाद केंद्रीय वित्त मंत्री ने 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट को संसद में रखा। रिपोर्ट में अगले पांच वर्षों के लिए राज्यों को करों के बंटवारे और अनुदानों की रूपरेखा तय की गई है। हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य के लिए, जो अपने खर्चों और आपदा से जुड़ी देनदारियों को पूरा करने के लिए केंद्र पर काफी हद तक निर्भर है, यह संभावित आवंटन महत्वपूर्ण वित्तीय राहत प्रदान कर सकता है।
इसके अलावा, पर्वतीय राज्य होने, सीमित राजस्व आधार और अपेक्षाकृत अधिक व्यय आवश्यकताओं के चलते हिमाचल प्रदेश को अनुदान राशि के रूप में भी बड़ी राशि मिलने की उम्मीद है। इनमें राजस्व घाटा अनुदान, आपदा प्रबंधन सहायता तथा ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के लिए सहायता शामिल है। मौजूदा रुझानों के अनुसार, अगले पांच वर्षों में अनुदानों की कुल राशि 45,000 करोड़ से 50,000 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है।
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