बैतूल , अगस्त 01 -- मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की धार्मिक नगरी मुलताई को वर्ष 2009 में मां ताप्ती के उद्गम स्थल के कारण 'पवित्र नगरी' का दर्जा मिला था, लेकिन डेढ़ दशक बीत जाने के बाद भी यहां धार्मिक पर्यटन के अनुरूप बुनियादी सुविधाओं का विकास नहीं हो सका है। ताप्ती परिक्रमा मार्ग पर अतिक्रमण, पार्किंग की कमी, शौचालय, पेयजल, विश्राम गृह और सूचना केंद्र जैसी आवश्यक सुविधाओं के अभाव से श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, पिछले एक वर्ष से ताप्ती भक्तों द्वारा चलाए जा रहे अभियान का असर अब प्रशासनिक स्तर पर दिखाई देने लगा है। प्रशासन ने ताप्ती उद्गम क्षेत्र और परिक्रमा मार्ग से जुड़े अतिक्रमणों की नापजोख का कार्य पूरा कर लिया है। अब लोगों को अवैध कब्जों के विरुद्ध कार्रवाई का इंतजार है।

ताप्ती संरक्षण अभियान से जुड़े दिनेश कालभोर और गोलू उघड़े ने बताया कि उनकी टीम पिछले एक वर्ष से उद्गम क्षेत्र के संरक्षण, परिक्रमा मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराने, जल संरक्षण और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा अतिक्रमण की नापजोख पूरी कर लिया जाना सकारात्मक कदम है, लेकिन वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब अवैध कब्जे हटाकर परिक्रमा मार्ग को श्रद्धालुओं के लिए सुगम बनाया जाएगा।

ताप्ती भक्तों की पहल के बाद अब 'ताप्ती लोक न्यास' के गठन और 'ताप्ती विकास प्राधिकरण' स्थापित करने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पवित्र नगरी के समग्र विकास के लिए अलग बजट, दीर्घकालिक मास्टर प्लान और एक समर्पित नोडल एजेंसी की आवश्यकता है, ताकि धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विकास की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बैतूल को नगर निगम बनाने की प्रशासनिक प्रक्रिया तेज होने के बीच मुलताई की उपेक्षा को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। उनका मानना है कि पवित्र नगरी का दर्जा मिलने के बावजूद यहां श्रद्धालुओं के लिए अपेक्षित सुविधाएं विकसित नहीं की गईं, जिससे धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) वीरेंद्र तिवारी ने बताया कि ताप्ती परिक्रमा मार्ग से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जल्द प्रारंभ की जाएगी। उन्होंने कहा कि पवित्र नगरी से संबंधित नियमों का भी सख्ती से पालन कराया जाएगा तथा क्षेत्र के व्यवस्थित विकास के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

स्थानीय नागरिकों और ताप्ती भक्तों को उम्मीद है कि प्रशासनिक कार्रवाई और प्रस्तावित विकास योजनाओं के अमल से आने वाले समय में मुलताई वास्तव में अपने 'पवित्र नगरी' के स्वरूप के अनुरूप विकसित हो सकेगी।

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