बैतूल , सितंबर 10 -- मध्यप्रदेश के बैतूल शहर में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित सीवरेज ट्रीटमेंट परियोजना को लेकर असमंजस की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान होने वाली खुदाई और नागरिकों को संभावित परेशानी को देखते हुए इसके मौजूदा स्वरूप में बदलाव की तैयारी की जा रही है। नगर पालिका अधिकारियों ने परियोजना से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतों से जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया है।

प्रस्तावित परियोजना के तहत शहर में सीवरेज नेटवर्क बिछाने के साथ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण किया जाना है। जानकारी के अनुसार परियोजना नगर पालिका की ओर से अलग से मांग किए जाने के बजाय शासन स्तर से स्वीकृत कर आगे बढ़ाई गई है। नगर पालिका ने प्रारंभिक तैयारियां शुरू करने के साथ निविदाएं भी आमंत्रित की हैं।

परियोजना के मौजूदा स्वरूप को लेकर नगर पालिका स्तर पर सबसे बड़ी चिंता घने रिहायशी इलाकों में सीवरेज पाइपलाइन बिछाने के लिए बड़े पैमाने पर सड़कों और गलियों की खुदाई को लेकर है। अधिकारियों के अनुसार योजना को इसी स्वरूप में लागू करने पर शहर के विभिन्न हिस्सों में पाइपलाइन बिछाने के लिए खुदाई करनी पड़ेगी, जिससे यातायात प्रभावित होने के साथ नागरिकों को लंबे समय तक परेशानी हो सकती है।

बैतूल में पूर्व में यूआईडीएसएसएमटी योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने के दौरान भी कई क्षेत्रों में सड़क खुदाई से नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ी थी। इसी अनुभव को देखते हुए अधिकारी सीवरेज परियोजना को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने के पक्ष में हैं। घनी बस्तियों में खुदाई से घरों और दुकानों तक वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने, सड़कें क्षतिग्रस्त होने तथा निर्माण पूरा होने तक धूल, यातायात अवरोध और आवागमन संबंधी समस्याएं बढ़ने की आशंका है।

परियोजना के निर्माण के बाद रखरखाव और सीवरेज नेटवर्क की क्षमता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जानकारों के अनुसार प्रस्तावित पाइपलाइन के व्यास और भविष्य में बढ़ने वाली आबादी के लिहाज से नेटवर्क की क्षमता का पर्याप्त आकलन जरूरी है। क्षमता भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नहीं होने पर जाम, ओवरफ्लो और बार-बार मरम्मत जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर प्रस्तावित सीवरेज चैंबरों की संख्या और उनकी स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि चैंबरों की डिजाइन, ऊंचाई और स्थान का सही निर्धारण नहीं होने पर वे यातायात और पैदल आवागमन में परेशानी का कारण बन सकते हैं।

नगर पालिका सूत्रों के अनुसार परियोजना से जुड़ी संभावित परेशानियों की जानकारी जनप्रतिनिधियों को दी गई है। अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि शहर के घने हिस्सों में एक साथ बड़े स्तर पर खुदाई करने के बजाय ऐसी योजना तैयार की जाए, जिससे निर्माण के दौरान नागरिकों को कम से कम परेशानी हो। जनप्रतिनिधियों ने भी अधिकारियों द्वारा बताई गई कई दिक्कतों को व्यावहारिक माना है। इसके बाद परियोजना को मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ाने के बजाय प्रारूप में बदलाव की संभावना पर विचार शुरू हुआ है।

नगर पालिका सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ स्तर से भी परियोजना की व्यवहारिकता को देखते हुए योजना में आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत शहर के अत्यधिक घने रिहायशी क्षेत्रों को सीवरेज नेटवर्क निर्माण की प्राथमिकता से बाहर रखने और कम आबादी वाले बाहरी क्षेत्रों में परियोजना पहले लागू करने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। इससे मुख्य बाजार, घनी बस्तियों और संकरी गलियों में बड़े पैमाने पर खुदाई से बचने के साथ परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की संभावना बढ़ सकती है।

हालांकि, परियोजना को पूरी तरह रद्द करने का कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। अधिकारियों के स्तर पर योजना की तकनीकी और व्यावहारिक समीक्षा किए जाने की बात कही जा रही है। अंतिम निर्णय शासन और संबंधित विभाग के स्तर पर परियोजना के संशोधित प्रारूप के आधार पर लिया जाएगा।

करीब 100 करोड़ रुपये की परियोजना में शहर की वास्तविक जरूरत, भविष्य की आबादी, नेटवर्क की क्षमता और निर्माण के दौरान नागरिकों को होने वाली परेशानी के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया जा रहा है। योजना में बदलाव होने पर इसका उद्देश्य परियोजना रोकना नहीं, बल्कि इसे बैतूल शहर की भौगोलिक और यातायात परिस्थितियों के अनुरूप अधिक व्यावहारिक बनाना होगा।

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