चंडीगढ़ , अगस्त 25 -- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करते हुए भूजल के मिश्रण से पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने वाले पुराने जल संयंत्रों को आरसीसी आधारित संरचनाओं में बदलने के निर्देश दिए हैं। करीब 1,000 करोड़ रुपये की लागत से 466 ईंट निर्मित जल संयंत्रों को आरसीसी आधारित संयंत्रों में परिवर्तित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने मंगलवार को लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जहां संभव हो, ट्यूबवेल आधारित जल संयंत्रों को प्राथमिकता के आधार पर नहर आधारित जल आपूर्ति प्रणाली से जोड़ा जाए।

विभाग के प्रधान सचिव पंकज यादव ने बताया कि प्रदेश में 1,888 नहर आधारित जल परियोजनाएं, 4,199 बूस्टिंग स्टेशन, 12,404 ट्यूबवेल और पांच रैनी वेल योजनाएं संचालित हैं। विभाग 3,674 ट्यूबवेल ग्राम पंचायतों को सौंप चुका है।

उन्होंने बताया कि 103 नए नहर आधारित जल संयंत्र, 1,065 ट्यूबवेल, 369 बूस्टिंग स्टेशन और दो रैनी वेल का निर्माण चल रहा है। 7,005 किलोमीटर के वितरण नेटवर्क में से 1,525 किलोमीटर पाइपलाइन बदली जानी है, जिसमें 837 किलोमीटर पाइपलाइन मार्च 2027 तक बदलने का लक्ष्य है।

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