, May 11 -- श्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर के हजार वर्षों के विध्वंस और पुनर्जीवन के इतिहास का वर्णन करते हुए कहा कि महमूद गजनबी और अलाउद्दीन खिलजी जैसे आक्रमणकारियों के लगातार हमलों के बावजूद राजा भोज, भीमदेव प्रथम, कुमारपाल, महीपाल प्रथम और राव खंगार जैसे समर्पित शासकों ने बार-बार मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इसे नष्ट किया, उन्होंने केवल पत्थर और गारे को देखा, लेकिन वे भारतीय सभ्यता की बौद्धिक और आध्यात्मिक शक्ति को कभी नहीं समझ सके। उन्होंने आधुनिक सोमनाथ के पुनर्निर्माण में योगदान देने वाली हस्तियों को याद करते हुए कहा ," उनकी स्मृति हमें प्रेरित करती है कि हमें केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे नहीं बढ़ाना है, बल्कि यह जिम्मेदारी आने वाली पीढ़ियों को भी सौंपनी है।"प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सांस्कृतिक स्थल हजारों वर्षों से राष्ट्र की पहचान रहे हैं। स्वतंत्रता के बाद के भारत की एक पीड़ादायक विडंबना की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि इस विरासत का संरक्षण करने वालों को नेतृत्व के भीतर से विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद सरदार पटेल के अटल संकल्प ने राष्ट्र को सदियों के अपमान से मुक्त किया।

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